तुलसी से रामबाण इलाज

                  तुलसी से  रामबाण इलाज


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प्राचीन काल से ही आयुर्वेद हमारे जीवन में बहुत सहायक रहा है तुलसी आयुर्वेदिक उपचार के लिए काफी प्रभावशाली है। तुलसी की पत्तियां, बीज, टहनी सबके अपने अलग-अलग फायदे हैं। चलिए जानते हैं तुलसी से होने वाले फायदो के बारे में।और बदलते समय के साथ इसका प्रभाव कम नहीं हुआ है। आज के युग में, आयुर्वेद को पहले जितना ही पहचाना जाता है। आयुर्वेद की विभिन्न जड़ी-बूटियों में जड़ी-बूटी तुलसी को भी शामिल किया गया है, जिसे अन्य जड़ी-बूटियों की तुलना में काफी पवित्र माना जाता है। हम तुलसी का विभिन्न तरीकों से उपयोग कर सकते हैं और इसके लाभों को भी काफी माना जाता है। हम अपने शरीर में उत्पन्न होने वाले तनाव का मुकाबला करने के लिए तुलसी नाम की जड़ी बूटी का उपयोग अन्य एडाप्टोजेनिक जड़ी बूटियों के साथ कर सकते हैं। आज, तुलसी को अधिकांश देशों में आयुर्वेदिक चिकित्सा में सबसे उपयुक्त दर्जा दिया गया है और अधिकांश लोगों ने अपने घरों में इस दवा के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है। तुलसी का व्यापक रूप से आयुर्वेदिक हर्बल चाय और अन्य मिश्रण में उपयोग किया जाता है।तुलसी को आप अपने घर के आंगन में भी उगा सकते हैं। सामान्य तौर पर तुलसी के पौधे के लिए किसी ख़ास तरह के जलवायु की आवश्यकता नहीं होती है। इसे कहीं भी उगाया जा सकता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के पौधे का रखरखाव ठीक ढंग से ना करने पर या पौधे के आसपास गंदगी होने पर यह पौधा (Tulsi Plant) सूख जाता है

 तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें विटामिन (Vitamin) और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सभी रोगों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाले गुणों से भरपूर इस औषधीय पौधे को प्रत्यक्ष देवी कहा गया है क्योंकि इससे ज्यादा उपयोगी औषधि मनुष्य जाति के लिए दूसरी कोई नहीं है। तुलसी के धार्मिक-महत्व के कारण हर-घर आगंन में इसके पौधे लगाए जाते हैं। तुलसी (Basil in Hindi) की कई प्रजातियां मिलती हैं। जिनमें श्वेत व कृष्ण प्रमुख हैं। इन्हें राम तुलसी और कृष्ण तुलसी भी कहा जाता है।

चरक संहिता और सुश्रुत-संहिता में भी तुलसी के गुणों के बारे में विस्तार से वर्णन है। तुलसी का पौधा  (Tulsi Plant) सामान्तया 30 से 60 सेमी तक ऊँचा होता है और इसके फूल छोटे-छोटे सफेद और बैगनी रंग के होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से अक्टूबर तक होता है।

प्राचीन काल से विभिन्न रोगों और उनके लक्षणों को ठीक करने के लिए तुलसी का उपयोग किया जाता है। तुलसी के उपयोग के विभिन्न लाभ हैं क्योंकि यह सभी जड़ी-बूटियों की तुलना में अत्यधिक शुद्ध और फलदायी माना जाता है और कुछ लोगों को जड़ी-बूटियों की रानी भी कहा जाता है। तो आइए नजर डालते हैं इससे होने वाले फायदों पर।

मूत्र में जलन से आराम 

मूत्र में जलन होने पर भी तुलसी के बीज का उपयोग करने से आराम मिलता है।तुलसी के बीज (Tulsi seeds) और जीरे का चूर्ण 1 ग्राम लेकर उसमें 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ लेने से मूत्र में जलन, मूत्रपूय तथा वस्तिशोथ (ब्लैडर इन्फ्लेमेशनमें लाभ होता है।

पीलिया में लाभदायक है तुलसी  

पीलिया या कामला एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर इलाज ना करवाने से यह आगे चलकर गंभीर बीमारी बन जाती है। 1-2 ग्राम तुलसी (Tulsi plant) के पत्तों को पीसकर छाछ (तक्र) के साथ मिलाकर पीने से पीलिया में लाभ होता है। इसके अलावा तुलसी के पत्तियों  का काढ़ा बनाकर पीने से भी पीलिया में आराम मिलता है।  

पथरी दूर करने में फायदेमंद है तुलसी 

पथरी की समस्या होने पर भी तुलसी का सेवन करना फायदेमंद रहता है। इसके लिए तुलसी की  1-2 ग्राम पत्तियों को पीसकर शहद के साथ खाएं। यह पथरी को बाहर निकालने में मददगार होती है। हालांकि पथरी होने पर सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर ना रहें बल्कि नजदीकी डॉक्टर  से अपनी जांच करवायें।

प्रसव (डिलीवरी) के बाद होने वाले दर्द से आराम

प्रसव के बाद महिलाओं को तेज दर्द होता है और इस दर्द को दूर करने में तुलसी (Tulsi plant) की पत्तियां काफी लाभदायक हैं। तुलसी-पत्र-स्वरस में पुराना गुड़ तथा खाँड़ मिलाकर प्रसव  होने के बाद तुरन्त पिलाने से प्रसव के बाद होने वाले दर्द से आराम मिलता है।

नपुंसकता में लाभकारी 

तुलसी बीज चूर्ण अथवा मूल चूर्ण में बराबर की मात्रा में गुड़ मिलाकर 1-3 ग्राम की मात्रा में, गाय के दूध के साथ लगातार एक माह या छह सप्ताह तक लेते रहने से नपुंसकता में लाभ होता है।

कुष्ठ रोग (त्वचा रोग) में फायदेमंद है तुलसी का रस

अगर आप कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं तो जान लें कि तुलसी का सेवन कुष्ठ रोग को कुछ हद तक दूर करने में सहायक है। पतंजलि आयुर्वेद के अनुसार 10-20 मिली तुलसी पत्र-स्वरस को प्रतिदिन  सुबह पीने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

सफ़ेद दाग दूर करने में उपयोगी 

तुलसी पत्रस्वरस (1 भाग), नींबू रस (1 भाग), कंसौदी-पत्र-स्वरस-(1 भाग), तीनों को बराबर-बराबर लेकर एक तांबे के बर्तन में डालकर चौबीस घंटे के लिए धूप में रख दें। गाढ़ा हो जाने पर इसका लेप करने से ल्यूकोडर्मा (सफेद दाग या श्वित्र रोग) में लाभ होता है। इसको चेहरे पर लगाने से, चेहरे के दाग तथा अन्य चर्म विकार साफ होते हैं और चेहरा सुन्दर हो जाता है। इससे पता चलता है कि तुलसी के फायदे चेहरे के लिए कितने हैं। 

 रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार  

तुलसी (Tulsi plant) के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। 20 ग्राम तुलसी बीज चूर्ण (Tulsi seeds Powder) में 40 ग्राम मिश्री मिलाकर पीस कर रख लें।  सर्दियों में इस मिश्रण कीग्राम मात्रा का कुछ दिन सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वात एवं कफ से जुड़े रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा 5-10 मिली कृष्ण तुलसी-पत्र स्वरस में दोगुनी मात्रा में गाय का गुनगुना घी मिलाकर सेवन करने से भी वात और कफ से जुड़े रोगों से आराम मिलता है।

मलेरिया में फायदेमंद  

तुलसी का पौधा (Tulsi Plant) मलेरिया प्रतिरोधी है। तुलसी के पौधों को छूकर वायु में कुछ ऐसा प्रभाव उत्पन्न हो जाता है कि मलेरिया के मच्छर वहां से भाग जाते हैं, इसके पास नहीं फटकते हैं। तुलसी-पत्रों का काढ़ा बनाकर सुबह, दोपहर और शाम को पीने से मलेरिया में लाभ होता है।

टाइफाइड में उपयोगी 

अगर आप टाइफाइड से पीड़ित हैं तो तुलसी-मूल-क्वाथ को 15 मिली की मात्रा में दिन में दो बार पियें। तुलसी अर्क के फायदे से टाइफाइड का बुखार जल्दी ठीक होता है। यही नहीं बल्कि 20 तुलसी दल और 10 काली मिर्च के दाने दोनों को मिलाकर काढ़ा बना लें और किसी भी तरह का बुखार होने पर सुबह, दोपहर शाम इस काढ़े का सेवन करें। यह काढ़ा सभी प्रकार के बुखार से आराम दिलाने में कारगर है।

 बुखार से आराम 

तुलसी का पौधा से 7 तुलसी के पत्र तथालौंग लेकर एक गिलास पानी में पकाएं। तुलसी पत्र   लौंग को पानी में डालने से पहले टुकड़े कर लें। पानी पकाकर जब आधा शेष रह जाय, तब थोड़ा सा सेंधानमक डालकर गर्म-गर्म पी जाय। यह काढ़ा पीकर कुछ समय के लिए वत्र ओढ़कर पसीना ले लें। इससे ज्वर तुरन्त उतर जाता है तथा सर्दी, जुकाम खांसी भी ठीक हो जाती है। इस  काढ़े को दिन में दो बार दो तीन दिन तक ले सकते हैं। छोटे बच्चों को सर्दी जुकाम होने पर तुलसी 5-7 बूंद अदरक रस में शहद मिलाकर चटाने से बच्चों का कफ, सर्दी, जुकाम, ठीक हो जाता है। नवजात शिशु को यह अल्प मात्रा में दें।

 दाद और खुजली में तुलसी के अर्क के फायदे 

दाद और खुजली में तुलसी का अर्क अपने रोपण गुण के कारण लाभदायक होता है | यह दादमें होने वाली खुजली को कम करता है, और साथ ही उसके घाव को जल्दी भरने में मदद करता हैयदि तुलसी के अर्क का सेवन किया जाए तो यह रक्त शोधक (रक्त को शुद्ध करने वाला) होने के कारण अशुद्ध रक्त का शोधन अर्थात रक्त को साफ़ करता है और त्वचा संबंधित परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है

मासिक धर्म की अनियमितता में तुलसी के बीज के फायदे 

शरीर में वात दोष के बढ़ जाने के कारण मासिक धर्म की अनियमितता हो  जाती है | तुलसी के बीज में वात को नियंत्रित करने का गुण होता है इसलिए इसका प्रयोग मासिक धर्म की अनियमितता में किया जा सकता है | तुलसी का बीज कमजोरी दूर करने में सहायक होता है, जिसके कारण मासिक धर्म होने के दौरान जो कमजोरी महसूस होती है उसको दूर करने में मदद करता  है।

साँसों की दुर्गंध दूर करे तुलसी का उपयोग 

साँसों की दुर्गन्ध ज्यादातर पाचन शक्ति कमजोर हो जाने के कारण होती है | तुलसी अपने दीपन और पाचन गुण के कारण साँसों की दुर्गन्ध को दूर करने में सहायक होती है | इसमें अपनी स्वाभाविक सुगंध होने के करण भी यह सांसों की दुर्गन्ध का नाश करती है।

चोट लगने पर तुलसी का उपयोग 

चोट लगने पर भी तुलसी का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें रोपण और सूजन को कम करने वाला गुण होता है। तुलसी का यही गुण चोट के घाव एवं उसकी सूजन को भी  ठीक करने में सहायक होता है

तुलसी का उपयोग चेहरे पर लाये निखार

तुलसी का उपयोग चेहरे का खोया हुआ निखार वापस लाने के लिए भी किया जाता है, क्योंकि इसमें रूक्ष और रोपण गुण होता है | रूक्ष गुण के कारण यह चेहरे से की त्वचा को अत्यधिक तैलीय होने से रोकती है, जिससे कील मुंहासों को दूर करने मदद मिलती  है इसके अलावा रोपण गुण से त्वचा पर पड़े निशानों और घावों को हटाने में भी सहायता मिलती है | यदि तुलसी का सेवन किया जाये तो इसके रक्त शोधक गुण के कारण अशुद्ध रक्त को शुद्ध कर चेहरे की त्वचा को निखारा जा सकता हैखून बढ़ाने में मददगार तुलसी में फॉलेट और आयरन पाए जाते हैं। जो शरीर में खून बढाने में मदद करता है। प्रेग्नेंसी के दौरान तुलसी का सेवन करने से बहुत ही फायदेमंद होता है। Also Read - कभी सोचा है कि क्यों पीरियड्स के शुरू के 2 दिन दर्द से होता है बुरा हाल, जानें इसपर एक्सपर्ट का क्या कहना है अनीमिया से बचाती है तुलसी के सेवन करने से खून में हीमॉग्लोबिन का स्तर के साथ रेड ब्लड सेल्स की भी संख्या बढ़ती है। इम्यूनिटी बढ़ाती है तुलसी में विटामिन, फाइबर, जिंक, फॉस्फॉरस, कॉपर, मैग्नीशियम आदि तत्व होते हैं। जो शरीर में होने वाली कई बीमारियों से बचाने में मदद करती है। तुलसी का रोजाना सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ने में मदद मिलती है। चेहरे में ग्लो लाती है स्किन को बेहतर बनाने में तुलसी काफी फायदेमंद है। तुलसी का इस्तेमाल करने से कील-मुहांसे खत्म होते हैं और चेहरे पर निखार आता है। सर्दी, जुखाम में फायदेमंद अगर किसी को सर्दी है तो तुलसी के पत्ते में मिश्री, काली मिर्च और को पानी में अच्छी तरह से पकाकर उसका काढ़ा बना

सांप काटने पर तुलसी का उपयोग 

5-10 मिली तुलसी-पत्र-स्वरस को पिलाने से तथा इसकी मंजरी और जड़ों को पीसकर सांप के काटने वाली जगह पर लेप करने से सर्पदंश की पीड़ा में लाभ मिलता है। अगर रोगी बेहोश हो गया हो तो इसके रस को नाक में टपकाते रहना चाहिए

डायरिया और पेट की मरोड़ से आराम 

गलत खानपान या प्रदूषित पानी की वजह से अक्सर लोग डायरिया की चपेट में जाते हैं। खासतौर पर बच्चों को यह समस्या बहुत होती है। तुलसी की पत्तियां डायरिया, पेट में मरोड़ आदि समस्याओं से आराम दिलाने में कारगर हैं। इसके लिए तुलसी की 10 पत्तियां और 1 ग्राम जीरा दोनों को पीसकर शहद में मिलाकर उसका सेवन करें।

सूखी खांसी और दमा से आराम 

तुलसी की पत्तियां अस्थमा के मरीजों और सूखी खांसी से पीड़ित लोगों के लिए भी बहुत गुणकारी हैं। इसके लिए तुलसी की मंजरी, सोंठ, प्याज का रस और शहद को मिला लें और इस मिश्रण को चाटकर खाएं, इसके सेवन से सूखी खांसी और दमे में लाभ होता है।

गले से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद 

सर्दी-जुकाम होने पर या मौसम में बदलाव होने पर अक्सर गले में खराश या गला बैठ जाने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। तुलसी (Tulsi plant) की पत्तियां गले से जुड़े विकारों को दूर करने में बहुत ही लाभप्रद हैं। गले की समस्याओं से आराम पाने के लिए तुलसी के रस (Tulsi juice) को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर उससे कुल्ला करें। इसके अलावा तुलसी रस-युक्त जल में हल्दी और सेंधानमक मिलाकर कुल्ला करने से भी मुख, दांत तथा गले के सब विकार दूर होते हैं।

रतौंधी में लाभकारी है तुलसी का रस 

कई लोगों को रात के समय ठीक से दिखाई नहीं पड़ता है, इस समस्या को रतौंधी कहा जाता है। अगर आप रतौंधी से पीड़ित हैं तो तुलसी की पत्तियां (Basil leaves in hindi) आपके लिए काफी फायदेमंद है। इसके लिए दो से तीन बूँद तुलसी-पत्र-स्वरस को दिन में 2-3 बार आंखों में डालें।

दिमाग के लिए फायदेमंद हैं तुलसी की पत्तियां 

 दिमाग के लिए भी तुलसी के फायदे लाजवाब तरीके से काम करते हैं। इसके रोजाना सेवन से मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है और याददाश्त तेज होती है। इसके लिए रोजाना तुलसी की 4-5 पत्तियों को पानी के साथ निगलकर खाएं

  1. पहला तुलसी लाभ यह है कि जिन लोगों को अस्थमा, जुकाम, खांसी, फ्लू, गले में खराश और किसी भी प्रकार की सांस की बीमारी है या इसके लक्षण हैं, तो यह जड़ी बूटी आपको राहत दे सकती है।

 

  2. नियमित तुलसी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर और रक्तचाप को नियंत्रित करने का काम करता है। ऐसा करने से स्ट्रोक, हार्ट अटैक और अन्य संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जिन लोगों को अत्यधिक सिरदर्द होता है, उनका भी इस जड़ी बूटी से इलाज किया जा सकता है। और इसके नियमित सेवन से नींद की समस्या को हल किया जा सकता है।

 

  3. तुलसी के कई लाभों में से एक यह है कि यह अपच आंतों परजीवी, अल्सर उल्टी, मासिक धर्म ऐंठन का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है। जिनकी किडनी में पथरी के दर्द को रोकने और कम करने के लिए तुलसी की मदद ली जा सकती है। जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए तुलसी की चाय का उपयोग करें।

 

  4. ज्यादातर लोगों को मधुमेह की समस्या होती है, इसलिए यदि आप आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का सहारा लेना चाहते हैं तो तुलसी का उपयोग करना इसके लिए एक उपयुक्त विकल्प है। क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है और कार्बोहाइड्रेट और वसा के कुशल प्रसंस्करण को बढ़ावा दे सकता है। तुलसी का उपयोग करने के लाभों में से एक यह है कि यह मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया को समाप्त करता है, जो दांतों को साफ करता है और सांस लेता है।

 

इसे कैसे उपयोग करे।

 

उपरोक्त लाभों को पढ़ने के बाद, अब अगला सवाल उठता है कि तुलसी का उपयोग क्या है। यानी हमें तुलसी का उपयोग कैसे करना चाहिए। तुलसी को आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में एक एडाप्टोजेनिक जड़ी बूटी माना जाता है जिसका उपयोग हम तनाव कम करने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए करते हैं। तुलसी का उपयोग अस्थमा के हमलों को अधिक गंभीर होने से कम करता है और विषहरण को बढ़ावा दे सकता है। अगर हम हर्बल उत्पादों की बात करें तो तुलसी का योगदान सभी हर्बल पदार्थों में पाया जाता है। हमारे कई राजनेता अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए तुलसी का उपयोग भी करते हैं और इसे एक पवित्र औषधि भी मानते हैं। तुलसी के सभी उपयोगों में से, इसका उपयोग हर्बल चाय बनाने के लिए किया जाता है या हम इसका उपयोग करके सूखी तुलसी पाउडर का उपयोग भी कर सकते हैं। तुलसी तीन प्रकार की होती है जिसे आमतौर पर राम तुलसी, कृष्णा तुलसी और वन्ना तुलसी के नाम से जाना जाता है। अब अगर हम इसके प्रभाव के अनुसार इस श्रेणी को बंद करते हैं, तो कृष्णा तुलसी को अन्य तुलसी की तुलना में स्वास्थ्य के लिए अधिक प्रभावी माना जाता है। कृष्ण तुलसी के बाद, राम तुलसी और फिर अंत में तुलसी को शामिल किया जाता है क्योंकि तुलसी में कम शक्ति होती है लेकिन कभी-कभी हम इसे अन्य प्रकार की तुलसी के साथ भी मिला सकते हैं।

 


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